Hindi Love Stories
पायल से तो घायल होना हीं था
Written by Nishikant Tiwari Tuesday, 18 August 2009 00:22
Hindi Love Stories
कॉलेज से निकलते हीं मुझे एक सॉफ्टवेर कंपनी में नौकरी मिल गयी |कॉलेज में बहुत सुन रखा था कि कंपनियों में एक से बढ़कर एक सुन्दर लड़कियां काम करती है |सोचा प्यार की नैया जो कॉलेज में पानी में तक उतर ना पायी थी उसे कंपनी में गहरे समुंदर तक ले जाऊँगा |मैं यहाँ आते हीं उस अप्सरा की खोज में लग गया जिसे इस कहानी की नायिका बनना था पर किस्मत ने यहाँ भी साथ नहीं दिया |कोई भी लड़की पसंद नहीं आई | जो प्यार नहीं करते वो लड़कियों की बातें करते है | मैं भी उनसे अलग नहीं हूँ | यहाँ कंपनी में मेरी कई लोगो से दोस्ती हो गयी थी और सबकी मेरी जैसी हीं स्थिति थी | जिस प्रकार कामसूत्र के रचयिता वात्स्यान ने नारी जाती को मोरनी ,हिरनी आदि भागो में विभक्त किया है वैसे हीं उनसे प्रेरणा पाकर हमने भी लड़कियों की कोडिंग स्कीम तैयार कर ली थी |हमने लड़कियों को चार भागो में बांटा
१. वेरी गुड आईडिया
२. गुड आईडिया
३. नोट अ बैड आईडिया
४. नोट अ आईडिया एट ऑल
साथ हीं हमने सभी के पर्यावाची नाम भी रख दिए थे | उदाहरण के तौर पे मेरे सामने वाली लाइन में बैठी दो युवतियों का नाम रूपमती और डबल बैटरी रखा था क्योकि एक बहुत सुंदर थी और दूसरी बहुत मोटी |इस प्रकार के नाम कारन की आवश्यकता इस लिए पड़ी क्योंकि हमें किसी का नाम पता नहीं था |गुणों के हिसाब से नाम रखने पर याद करने में आसानी होती थी |इससे एक और लाभ यह था कि सामने वाले को मालुम नहीं चल पता था कि आप किसकी बात कर रहे है |
देर से हीं सही पर पायल से तो घायल होना हीं था | ऑफिस में इतनी सारी लडकियां थी पर मुझे वो हीं पसंद क्यों आई ये सवाल बार बार तंग करता | मंथन करने पर भीतर से उत्तर आया कि मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए जो सुंदर होने के साथ साथ कोमल ह्रदय वाली हो और बुद्धिमान होते हुवे भी भोली हो | जिसकी आँखों में शर्म हो व अपने देश कि संस्कृति झलके |मैं नहीं जानता पायल कितनी समझदार थी या सह्रिदयनि थी पर उसकी आँखों में वो लज्जा थी जिसकी मुझे तलाश थी |उसका चल चलन ,बात ब्योहार एक विशिष्ट शालीनता समेटे हुवे था |
पायल ,
मैं आशंकित हूँ कि कहीं तुम्हारी तबियत तो खराब नहीं हो गयी है |पिछले १५ दिनों से तुम ऑफिस जो नहीं आई हो | तुम कहाँ हो ? तुमसे बात करने का बड़ा मन कर रहा है | तुम सोचोगी कि मैं भी अजीब हूँ जब तुम सामने थी तो कभी बात नहीं की और अब बात करने के लिए बेताब हो रहा हूँ |पायल मैं मजबूर था | मैं डरता था कि मुझे बात करते देख शांतनु शायद तुमसे लड़ने ना लगे | मैं तुम्हे हमेशा खुश देखना चाहता हूँ पर मुझे ऐसा लगता है जैसे तुम्हारे चेहरे पर हमेशा एक हलकी सी वेदना छाई रहती है |पता नहीं ये सच है गलत | शायद मुझे यह पूछने का कोई हक़ नहीं फिर भी अगर तुम बता सकती तो मन को शांति मिलती |जल्दी आने की कोशिश करना |मुझे बेसब्री से तुम्हारा इंतज़ार रहेगा |
पायल
मैं और जोर जोर से ठोकरें मारने लगा | खून से बने पग चिह्न सड़क पर नहीं मेरे दिल पर पड़ रहे थे | कई इ मेल लिखे मोबाइल नो ० माँगा पर कोई जवाब नहीं आया | मेरा इंतज़ार एक कभी न ख़त्म होने वाला इंतज़ार बन के रह गया था | इश्वर से बस यही प्रार्थना करता कि कोई भी उसकी जिन्दगी में आए पर मेरे जैसा कोई कभी ना आये |पता नहीं वह किस हाल में होगी | घरवाले अब उसे शायद कभी नौकरी करने नहीं देंगे| पास होकर भी मैं उसके इतने पास नहीं था जितना कि अब हो गया हूँ | उसकी सिसकियों को सुन सकता हूँ | उसके घुटन को महसूस करके रह रह के गला रुंध जाता है |
By Nishikant Tiwari
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|115.113.58.xxx |2010-01-21 19:57:30 sushiIt's very good story. very fantastic story. who ever will read, will get enjoy.
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|114.143.88.xxx |2010-02-02 15:56:14 MAMTA - all the bestNishikantji hame apki story bahut pasand ayi... apk lekhan me ek sachhai jhalakti hai............ all the best for ur bright career
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hii ,
dear ye story kisi k dil ka haal hai sach hme aaj pta lag gya ki koi hum se bhi behtar sochta haiii jaise hum apni drmgrl ka wait kr rhe hai .. waise hii pta nhi kab aayegi apne sapno ki rani jo hme humse bhi zyada pyar krein ... my mail id is aryan.hcl@gmail.com i bcm 21 this 17april n working as Engg. In Wipro last 3ree months before this i was in HCL NOIDA NOW IN Wipro-IT
Thanks and Regards,
Veer Sharma
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gd morning nishant ,
i know the mean of true love , kyuki mai bhi aapki trhah apni drmgrl ke sapne dekhta tha wo sapna sach kiya ek faridabad ki ladki ne jisne mujhe bina dekhe propose kiya par baad mei caste ki wjhah se mujh se ek pal mei rishta tod diya , yar bahut dard hota hai hum to kisi k baarein mei nhi sochte waise bhi kabhi inkar ka dar hota hai dil mei to ikrar karne ki himmat nhi hotii
take care frnd n make ur carrer bright
veer bhardwaj
Wipro -IT
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|115.117.142.xxx |2010-02-20 18:58:23 manmohanकॉलेज से निकलते हीं मुझे एक सॉफ्टवेर कंपनी में नौकरी मिल गयी |कॉलेज में बहुत सुन रखा था कि कंपनियों में एक से बढ़कर एक सुन्दर लड़कियां काम करती है |सोचा प्यार की नैया जो कॉलेज में पानी में तक उतर ना पायी थी उसे कंपनी में गहरे समुंदर तक ले जाऊँगा |मैं यहाँ आते हीं उस अप्सरा की खोज में लग गया जिसे इस कहानी की नायिका बनना था पर किस्मत ने यहाँ भी साथ नहीं दिया |कोई भी लड़की पसंद नहीं आई | जो प्यार नहीं करते वो लड़कियों की बातें करते है | मैं भी उनसे अलग नहीं हूँ | यहाँ कंपनी में मेरी कई लोगो से दोस्ती हो गयी थी और सबकी मेरी जैसी हीं स्थिति थी | जिस प्रकार कामसूत्र के रचयिता वात्स्यान ने नारी जाती को मोरनी ,हिरनी आदि भागो में विभक्त किया है वैसे हीं उनसे प्रेरणा पाकर हमने भी लड़कियों की कोडिंग स्कीम तैयार कर ली थी |हमने लड़कियों को चार भागो में बांटा
१. वेरी गुड आईडिया
२. गुड आईडिया
३. नोट अ बैड आईडिया
४. नोट अ आईडिया एट ऑल
साथ हीं हमने सभी के पर्यावाची नाम भी रख दिए थे | उदाहरण के तौर पे मेरे सामने वाली लाइन में बैठी दो युवतियों का नाम रूपमती और डबल बैटरी रखा था क्योकि एक बहुत सु...
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- 2010-03-10 00:10:34 ...
that is a good one.bring some more en... - 2010-02-27 03:09:53 ...
i m totly agree with paraksh, she sho... - 2010-02-25 20:34:41 ...
hi good story bravo i am from vo... - 2010-02-25 20:32:15 ...
hi nishikant a very good and reali... - 2010-02-21 19:32:33 ...
well hi to all...i think ki soumya sa... - 2010-02-20 18:59:28 ...
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कॉलेज से निकलते हीं मुझे एक सॉफ्टवेर ...
